खेती के साथ पशुपालन से जनकलाल कर रहे है
नीमच -- जिले के ग्राम जवासा के किसान जनकलाल पिता देवीलाल मोबाईल नम्बर-9691587376 खेती के साथ-साथ पशुपालन कर, सालाना 4 से 5 लाख रूपये की अतिरिक्त कमाई कर रहे है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ हो गई है।
किसान जनकलाल पहले केवल खेती करते थे। जिससे उन्हे परिवार का खर्च चलाने लायक ही कमाई हो पाती थी। फिर एक दिन आत्मा योजना के कार्यक्रम में उन्हे समन्वित कृषि प्रणाली के बारे में पता चला, तो उन्होने खेती के साथ-साथ पशुपालन करने का भी मन बनाया और 2 गिर नस्ल 2 जर्सी नस्ल एवं दो एच.एफ.नस्ल की गायें खरीद कर लाये। जिन्हे वे घर के पास बाडे में रखकर, उन्हे हरा चारा, भूसा देते है और उनकी समुचति देख-भाल भी करते है। गांयो के गोबर से प्राप्त गोबर खाद पुन: खेती में उपयोग कर लेते है। पशुओं की समुचित देख भाल और उन्हे संतुलित पशु आहार देने से जनकलाल को प्रतिदिन 70 लीटर दूध प्राप्त होता है। जिसे वे 27 से 28 रूपये प्रतिलिटर के भाव से बेच कर, हर साल साढे सात से आठ लाख रूपये की कमाई कर रहे है।
जनकलाल को पशुपालन का सारा खर्च निकालने के बाद भी 4 से 5 लाख रूपये की शुद्ध कमाई हो रही है। यह कार्य वे खेती किसानी के साथ-साथ ही कर रहे है। जनकलाल अन्य किसान बन्धुओं को भी खेती के साथ्ा पशुपालन करने की सलाह देते है। जिससे कि उन्हे भी अतिरिक्त खेती के साथ पशुपालन से आमदनी हो सके।
किसान जनकलाल पहले केवल खेती करते थे। जिससे उन्हे परिवार का खर्च चलाने लायक ही कमाई हो पाती थी। फिर एक दिन आत्मा योजना के कार्यक्रम में उन्हे समन्वित कृषि प्रणाली के बारे में पता चला, तो उन्होने खेती के साथ-साथ पशुपालन करने का भी मन बनाया और 2 गिर नस्ल 2 जर्सी नस्ल एवं दो एच.एफ.नस्ल की गायें खरीद कर लाये। जिन्हे वे घर के पास बाडे में रखकर, उन्हे हरा चारा, भूसा देते है और उनकी समुचति देख-भाल भी करते है। गांयो के गोबर से प्राप्त गोबर खाद पुन: खेती में उपयोग कर लेते है। पशुओं की समुचित देख भाल और उन्हे संतुलित पशु आहार देने से जनकलाल को प्रतिदिन 70 लीटर दूध प्राप्त होता है। जिसे वे 27 से 28 रूपये प्रतिलिटर के भाव से बेच कर, हर साल साढे सात से आठ लाख रूपये की कमाई कर रहे है।
जनकलाल को पशुपालन का सारा खर्च निकालने के बाद भी 4 से 5 लाख रूपये की शुद्ध कमाई हो रही है। यह कार्य वे खेती किसानी के साथ-साथ ही कर रहे है। जनकलाल अन्य किसान बन्धुओं को भी खेती के साथ्ा पशुपालन करने की सलाह देते है। जिससे कि उन्हे भी अतिरिक्त खेती के साथ पशुपालन से आमदनी हो सके।
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