एम.बी.ए. कर चुनी खेती की राह स्वीट कार्न की खेती कर की अच्छी कमाई "सफलता की कहानी"
नीमच जिले की जावद जनपद के ग्राम हनुमंतिया निवासी विक्रम धाकड मूल रूप से कृषक परिवार से है। उन्होने एम.बी.ए.किया। किसी निजी कम्पनी में सेवा देने की बजाय उन्होने अपने गॉव में ही कुछ करने की सोची। आत्मा परियोजना के ब्लाक तकनीकी मेनेजर श्री रामबरन जाटव ने कृषि में विक्रम धाकड की रूचि को देखते हुए राज्य के बाहर भ्रमण के लिये भेजा, जिससे उन्हें तकनीकी ज्ञान प्राप्त हुआ। इन्टरनेट पर जब बाजार मांग के अनुसार खेती करने के बारे में पढ़ा तो ज्ञात हुआ कि अगर मांग और पूर्ति का संतुलन बनाया जाये तो फसल की अच्छी कीमत प्राप्त की जा सकती है।
इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए श्री विक्रम धाकड ने स्वीट कार्न लगाने का निर्णय लिया और मांग के अनुरूप 15 दिवस के अंतर पर 4 बार अलग-अलग तारीख में स्वीट कार्न लगाया ताकि निरंतर बाजार में हरें भुट्टों की पूर्ति की जा सके। बुआई समय में अन्तर रखने के कारण 2 माह तक बाजार में नियमित रूप से भुट्टे बेचने का कार्य किया। मांग और आपूर्ति में संतुलन होने से हमेशा अच्छे भाव मिले। चार बीघा में विक्रम धाकड द्वारा 7 कि.ग्रा. बीज चार बार में लगाया गया। मजदूरी, अन्य खर्च और बाजार तक पहुचंने में 20 हजार का कुल खर्चा हुआ। 20 रूपये प्रति किलों ग्राम की दर पर कुल उपज 80 क्विंटल को बेचने से एक लाख 60 हजार रूपये की आय प्राप्त हुई।
इस प्रकार एक लाख 40 हजार की कुल आय हुई जो कि सामान्य ज्यादा दिनों में जब भुट्टों की आवक एक साथ होने से भाव कम (10 रूपये प्रति किलोग्राम) से केवल 60 हजार रूपये ही होती है। इस प्रकार स्वीट कॉर्न की खेती से परंपरागत खेती की तुलना में अधिक लाभ हुआ। श्री विक्रम धाकड आत्मा परियोजना के सभी अधिकारियों के बहुत आभारी है, जिन्होनें उन्हें कृषि की तकनीकी जानकारी के मार्गदर्शन देकर, उनकी सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए श्री विक्रम धाकड ने स्वीट कार्न लगाने का निर्णय लिया और मांग के अनुरूप 15 दिवस के अंतर पर 4 बार अलग-अलग तारीख में स्वीट कार्न लगाया ताकि निरंतर बाजार में हरें भुट्टों की पूर्ति की जा सके। बुआई समय में अन्तर रखने के कारण 2 माह तक बाजार में नियमित रूप से भुट्टे बेचने का कार्य किया। मांग और आपूर्ति में संतुलन होने से हमेशा अच्छे भाव मिले। चार बीघा में विक्रम धाकड द्वारा 7 कि.ग्रा. बीज चार बार में लगाया गया। मजदूरी, अन्य खर्च और बाजार तक पहुचंने में 20 हजार का कुल खर्चा हुआ। 20 रूपये प्रति किलों ग्राम की दर पर कुल उपज 80 क्विंटल को बेचने से एक लाख 60 हजार रूपये की आय प्राप्त हुई।
इस प्रकार एक लाख 40 हजार की कुल आय हुई जो कि सामान्य ज्यादा दिनों में जब भुट्टों की आवक एक साथ होने से भाव कम (10 रूपये प्रति किलोग्राम) से केवल 60 हजार रूपये ही होती है। इस प्रकार स्वीट कॉर्न की खेती से परंपरागत खेती की तुलना में अधिक लाभ हुआ। श्री विक्रम धाकड आत्मा परियोजना के सभी अधिकारियों के बहुत आभारी है, जिन्होनें उन्हें कृषि की तकनीकी जानकारी के मार्गदर्शन देकर, उनकी सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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