मुख्यमंत्री चरण पादुका योजना से संग्राहकों को मिला सम्मान - अब न जलेंगे पैर और न ही चुभेंगे कांटे

 सिवनी --   यह कहानी है पुरंती बाई सहित जिले के 1 लाख से अधिक तेन्दूपत्ता संग्राहक की, जिनको तेन्दूपत्ता तोड़ते समय चिलचिलाती धूप में पैरों के जलने, नुकीले पत्थर, गिट्टी और कांटे चुभने से तकलीफ होती थी। अब इन तेन्दूपत्ता संग्राहकों के न तो पैर जलेंगे और न ही कांटे चुभेंगे। साथ ही अब भरी दोपहरी में प्यास लगने पर उन्हें भटकना नही पड़ेगा, पीने के लिए शीतल जल उनके पास ही होगा।
   यह सब प्रदेश शासन की वनवासी तेंदुपत्ता संग्राहक भाईयो-बहनों के कष्ट व तकलीफों के प्रति सवेदनशीलता से ही संभव हो सका है। शासन द्वारा अपने तेंदुपत्ता संग्राहको के सम्मान में मुख्यमंत्री चरणपादुका योजना प्रारंभ कर संग्राहको को चरणपादुका, वन रस्ते के लिए पानी ले जाने बोतल और बहनों को साड़ी देकर सम्मानित किया जा रहा है|
   सिवनी जिले में विगत 5 मई को आयोजित हुए तेंदुपत्ता संग्राहक सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोमा निवासी श्रीमती पुरंती बाई को अपने हाथों से चप्पल पहनाई। पुरंती बाई इस एहसास से भाव-विभोर हो गई कि प्रदेश का मुखिया उसे अपने हाथों से चप्पल पहना रहे हैं। पुरंती बाई ने मन ही मन मुख्यमंत्री को लाखों दुआएँ दी। अब पुरंती बाई और उसके अन्य साथी महुआ बिनने और तेन्दूपत्ता संग्रहण का काम धूप, कंकड़-पत्थर की चिंता किये बगैर अच्छे तरीके से कर सकेंगे।
   पुरंती बाई को मुख्यमंत्री ने साड़ी और पानी को ठंडा रखने के लिये बॉटल भी दी। पुरंती बाई छोटी-छोटी जरूरत की चीज पाकर बहुत खुश है। उसका मानना है कि अब जंगल में पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। पुरंती बाई की तरह ही अन्य लाखों तेन्दूपत्ता संग्राहक प्रदेश शासन द्वारा संचालित इस कल्याणकारी योजना की सराहना करते नहीं थक रहे हैं।

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