राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से सबूबाई के जीवन में खुशियों ने दी दस्तक

 देवास --   जिले के खातेगांव विकासखंड की महिला सबू बाई ने आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर अपने गांव व समाज में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसके माध्यम से वे न केवल स्वयं के परिवार को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में सफल हुई है, बल्कि अपने समूह की दूसरी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में सहयोगी बन रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद सबूबाई के जीवन में खुशियों ने दस्तक दी है। अब वे मजदूर से डेरी संचालक बन गई है इससे उन्हें सालाना लगभग डेढ़ लाख रुपए की कमाई हो रही हैं। 
   विकासखण्ड खातेगांव क्षेत्र के ग्राम कुंडगांवखुर्द पंचायत मुर्झाल की सबूबाई पति रामदयाल एक घरेलू महिला हैं तथा कक्षा 5वीं तक ही पढ़ी लिखी हैं। वह एक गरीब परिवार से है, मजदूरी करके ही परिवार का भरण पोषण होता है। उतने में परिवार की पूर्ति नहीं हो पाती थी। सबू बाई अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने के लिए सदैव प्रयासरत रहती थी। किंतु तंगी के कारण कोई अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पा रही थी। सौभाग्य से मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन उनके लिए एक सुअवसर बनकर आया है। इसके द्वारा मिली सहायता से डेरी का व्यवसाय शुरू किया। जिससे आज उनकी आजीविका चल पड़ी। 
स्व सहायता समूह से जुड़कर कमाया मुनाफा
   सबूबाई ने बताया कि म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन विकासखण्ड खातेगांव ग्राम कुंडगांव में समूह के बारे में साधारण सभा हुई तब उन्हें समूह के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त हुई, तभी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सांई स्व-सहायता समूह जुड़ गई। सबू बाई बताती है कि सभी 11 सूत्रों का पालन करने से हमारे समूह को आजीविका मिशन के माध्यम से रिवाल्विंग फण्ड प्राप्त हुआ। जिससे उन्होंने डेरी का व्यवसाय प्रारंभ किया। इस आय से सबू बाई ने समूह का ऋण मूलधन एवं ब्याज सहित वापस कर दिया।
प्रतिदिन अच्छी हो रही है कमाई
   सबू बाई ने बताया कि समूह की गतिविधियां अच्छी चलने लगी है। उन्होंने बताया कि मजदूरी से जहां 4 हजार 800 रुपए की कमाई होती थी। वहीं समूह से जुड़ने के बाद प्रतिदिन 390 रुपए, माह में 11 हजार 700 रुपए तथा साल में एक लाख 40 हजार रुपए से अधिक की कमाई हो रही है। समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में कई उल्लखेनीय बदलाव आए हैं। उन्होंने हाल में कुछ जमीन भी खरीदी है, जिससे वे खेती का कार्य भी संचालित कर रही है। वहीं उनकी आर्थिक स्थिति के साथ-साथ सामाजिक स्थिति में भी परिवर्तन आया है। डेरी संचालन के साथ-साथ कृषि कार्य प्रारंभ करने से उनकी आजीविका ठीक से चल पड़ी है और जीवन में खुशहाली आ गई है।
किया जा रहा है स्व-सहायता समूह के रूप में संगठित
   उल्लेखनीय है कि ग्रामीण गरीब परिवारों में सामुदायिक संस्थाओं का विकासकर उन्हें आजीविका के स्थायी अवसर उपलब्ध करने एवं उनके आर्थिक एवं सामाजिक विकास को सुनिश्चित कराने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के रूप में वर्ष 2012 में पुनर्गठन किया गया। मिशन के अंतर्गत सभी ग्रामीण निर्धन परिवारों को स्व-सहायता समूह के रूप में संगठित किया जा रहा है। इन समूहों को आवश्यकतानुसार उच्च स्तरीय एवं गतिविधि आधारित फेडरेशन का गठन कर उन्हें सशक्त किया जाता है।
मुख्यमंत्री का मान रही है आभार
   सबू बाई एवं समूह की अन्य महिलाएं स्वयं का रोजगार स्थापित होने से हर्षित हैं। वे सभी स्वावलंबी बनने पर मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान का हृदय से आभार मान रही हैं। साथ ही वे सभी जिला प्रशासन का भी आभार मान रही है कि विभागीय अधिकारियों ने शासन की इस महत्ती योजना से जोड़ा तथा उनकी आय में वृद्धि की। वे कहती हैं कि प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही जनहितैषी योजनाओं में सभी को लाभ मिल रहा है।

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