सागर में आजीविका मिशन का कमाल , एक लाख 34 हजार सदस्य बने लखपति
सागर -- ग्रामीण निर्धन परिवारों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित मध्यप्रदेश राज्य आजीविका मिशन से स्वसहायता समूहों के एक लाख 34 हजार सदस्य लखपति बन गये है। हर सदस्य की आय अब एक लाख रुपये से अधिक हो गई है। इस अभियान में 2 लाख 8 हजार स्वसहायता समूहों में 23 लाख 88 हजार परिवार अपना जीवकोपार्जन कर रहे हैं। इनमें से एक लाख 58 हजार 393 समूहों को ऋण के रूप में बैंको से 2024 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई गई है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, आजीविका मिशन (ग्रामीण) ने बताया कि प्रदेश के 43 जिलों के 271 विकासखंडों में मिशन की गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं, जिसमें 6 लाख 55 हजार ग्रामीण बेरोजगार युवकों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया गया है। स्व-सहायता समूह में आर्थिक गतिविधियों का लेखाजोखा ठीक तरह से संधारित करने के लिए एक लाख 8 हजार 187 समूहों को बुक कीपिंग का प्रशिक्षण दिलवाया गया है। स्व-सहायता समूहों द्वारा विभिन्न रोजगार मूलक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। प्रदेश में 498 समूहों द्वारा उत्पादित सब्जियों के विक्रय के लिए आजीविका फ्रेश संचालित किए जा रहे हैं और 14 हजार 670 समूहों द्वारा वस्त्र निर्माण की गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। इसी प्रकार 402 समूहों द्वारा सेनटरी नेपकिन निर्माण इकाई स्थापित की गई हैं, 528 समूहों द्वारा अगरबत्ती उत्पादन कार्य तथा 89 हजार 269 परिवारों द्वारा दुग्ध उत्पादन कार्य किया जा रहा है। डेढ़ लाख परिवार गैर कृषि आजीविका गतिविधियों में संलग्न हैं, 25 जिलों में 2877 समूहों द्वारा साबुन निर्माण, 698 समूहों द्वारा गुड़, मूंगफली, चिक्की निर्माण, 1236 समूहों द्वारा हाथकरघा उद्योग संचालित किये जा रहे हैं। प्रदेश में 37 समूह बड़ी औद्योगिक इकाईयों के सहयोगी उत्पाद बना रहे हैं। इन समूहों की आय का एकमुश्त अनुमान लगाया जाए, तो एक लाख 43 हजार सदस्य औसतन एक लाख रूपये से अधिक आय अर्जित कर रहे हैं।

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