सरकार की योजना का लाभ लेकर रमेश अब बन गये हैं दूध के बड़े व्यवसायी
सागर -- दूध ने सागर जिले के राहतगढ ब्लॉक के जरारा गांव के निवासी श्री रमेश यादव की जिन्दगी पूरी तरह से बदल दी है। पशुपालक रमेश अब दूसरों के लिये मिसाल बन गये हैं। वे बताते हैं कि पहले उनके पास खेती के लिये बहुत ही कम जमीन थी, जिससे उन्हें अपना परिवार पालने में भी मुश्किल होती थी। तब उन्होंने पशुपालन करने की ठानी। लेकिन दूध से होने वाली आय पशुओं की खुराक में ही खर्च हो जाती थी। पर यह दौर भी रमेश की जिंदगी में जल्द ही चला गया, जब उनकी मुलाकात राज्य सरकार की किसानों को वित्त और मार्गदर्शन मुहैया कराने हेतु चलायी जा रही आत्मा परियोजना की एक कृषक संगोष्ठी में श्री दीपेश मोघे एवं कृषि विज्ञान केन्द्र की वैज्ञानिक श्रीमती विवेकिन पचौरी से हुई। इनके मार्गदर्शन में रमेश ने अपनी डेयरी को विस्थापित किया। विभाग की योजनाओं की जानकारी लेकर उन्होंने नये सिरे से दुग्धोत्पादन शुरू किया। वे बताते है कि अब उनके पास मुर्रा एवं देशी नस्ल की लगभग 50 भैंसे, 25 नवजात पशु हैं। इनसे रोजाना 300 से 350 लीटर दूध मिल रहा है और रोजाना 2500 रूपये शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। रमेश अपने पशुओं के लिये खुद ही चारा पैदा करते हैं। इसके अलावा गोबर खाद बनाकर अपने खेत की उर्वराशक्ति भी बढा रहे हैं। बची खाद अन्य किसानों को बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी वे ले रहे हैं। उन्नत पशुपालक के रूप में रमेश ने अपने सभी पशुओं का बीमा भी कराया है। वे समय-समय पर पशुओं को टीके भी लगवाते है। दुधारु पशु वत्सोत्पादन के लिए वे कृत्रिम गर्भाधान तकनीक का इस्तेमाल करते है। यदि पशु बीमार हो जाता है, तो तुरंत प्राथ्मिक उपचार कराते है। रमेश अब अपने बेटे के साथ एक सफल डेयरी व्यवसायी के रूप में खुद को स्थापित कर चुके हैं और गांव के बेरोजगार युवाओं को अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की प्रेरणा देते हैं।
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