विभिन्न आजीविका गतिविधियों से सुदृढ़ हुई राजकुमारी की आजीविका "सफलता की कहानी"


आजीविका समूह और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से चल रहा सिंलाई सेंटर और रेडीमेड गारमेंट्स का व्यवसाय 
अनुपपुर

   अनूपपुर जिले के विकास खण्ड पुष्पराजगढ अंतर्गत ग्राम किरगी मे निवास करने वाली राजकुमारी जयसवाल आज से 3-4 वर्ष पहले एक आम ग्रामीण महिला की तरह अपने जीवन यापन कर रही थी। उनकी सिंलाई की छोटी सी दुकान थी जिसे दोनो पति पत्नि मिलकर चलाते थे और अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। पैसे के अभाव के कारण व्यवसाय को बढ़ाने एवं कोई अन्य कार्य करने के बारे मे सोच नहीं पारहे थे। लेकिन 4 वर्ष पहले राजकुमारी जयसवाल म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत सीता समूह से जुडी तो उनके जीवन मे धीरे-धीरे सुखद परिवर्तन आना शुरू हो गये।
   राजकुमारी बताती हैं कि, समूह से जुडने के बाद मैने नियमित रूप से बचत करना शुरू किया और समूह से पहली बार बीस हजार रूपये का ऋण लेकर दीपावली के अवसर पर पटाखों का व्यवसाय पहली बार शुरू किया। त्यौहार के बाद पटाखा व्यवसाय से प्राप्त आय से मैने पूरी राशि ब्याज सहित समूह को धीरे धीरे वापस कर दी। उसके बाद फिर मैने दूसरे साल पचास हजार रूपये का ऋण लेकर दीपावली पर पटाखे का एवं पचास हजार रूपय का ऋण लेकर होली के अवसर पर रंगों का व्यवसाय किया एवं त्यौहार के बाद पूरा पैसा वापस पुनः धीरे-धीरे वापस कर दिया। पिछले दो अनुभवों ने मुझे हिम्मत दी और मैनें पचास हजार रूपय का ऋण लेकर अपने छोटे से सिलाई व्यवसाय को बढ़ाया। आज मेरे दुकान पर 6 कारीगर काम करती हैं और सभी खर्चो को काटने के बाद आठ से दस हजार रूपये की मासिक आमदनी सिलाई से हो जाया करती है। मेरी बड़ी बेटी आशा बीएससी प्रथम वर्ष मे पढने के साथ-साथ ब्यूटी पार्लर भी चलाती है, जिस से तीन से चार हजार रूपये की मासिक आमदनी हो जाती है।
   राजकुमारी बताती है कि मैने समूह से अभी तक कुल तीन लाख रू. का ऋण लेकर ब्याज सहित वापस कर दिया है। उन्होने आगे बताया कि 2017-18 वित्तीय वर्ष मे मैने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत एक लाख रूपये का ऋण लेकर रेडीमेड गार्मेंट की दुकान खोली है। इस तरह वर्तमान मे मै 4-5 से तरह गतिविधि कर रही हूं, जिस से मेरी मासिक आमदनी अठारह से बीस हजार रूपये हो जाती है। राजकुमारी जयसवाल बताती है कि समूह से जुडने के बाद उनके जीवन मे काफी सुखद परिवर्तन हुए है और उनके घर पर भी उनकी बात को महत्व दिया जाता है एवं समाज मे एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त हुआ है, वो बताती है कि आजीविका मिशन से जुडने के बाद मेरे और मेरे परिवार की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति काफी बेहतर हुई है और मै चाहती हूँ कि हमेशा आजीविका मिशन से जुडी रहूँ।

कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.