किसान का कमाल, एक ही जगह उगाए 4 किस्म के रंग-बिरंगे तरबूज
हरदा -- इट्स डिफरन्ट ! रंगत में तो है ही,स्वाद भी शहद सी मिठास लिए इन तरबूजों के भाव भी ज्यादा मिल रहे है,इतने कि पिछले बरस से पांच गुना ज्यादा।अगर आपको आर्गेनिक खेती के तरबूज का स्वाद चखना है तो धोधड़ा का रूख कीजिए। क्योकि वहां के किसान ने रंग बिरंगे तरबूज पैदा कर के एक मिसाल कायम की है। किसान प्रीतम सिंह राजपूत ने अपनें खेत के एक पोर्शन में बिना किसी रासायनिक और कीटनाशक दवाइयों के ये रंग बिरगे तरबूज उगाए है। जिसकी चर्चा दूर दूर तक हो रही है और तरबूजों को देखने के लिए खेत में अन्य किसान भी आ रहे है। हरदा का गांव घोंघड़ा जो कि कहने को तो छोटी घोंघई नदी से लगा हुआ है। वहां अगर पानी की बात करे तो यहां के किसानों को ज्यादातर बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है।जमीन का पानी भी इतना नीचे जा चुका है कि परंम्परागत खेती करना मुश्किल होती जा रहा है। इसलिए प्रीतम ने ड्रिप सिस्टम लगाकर खेती करने का प्रयास किया है जो काफी कामयाब है।प्रगतिशील किसान प्रीतम का कहना है कि सबसे पहले उन्होनें गोबर गैस प्लांट लगाया और उसके बाद कंपोसिट खाद बनाने के लिए प्लांट लगाया। गत वर्ष भी उन्होंने तरबूज की खेती की थी लेकिन उतनी सफलता नहीं मिली। साढ़े पांच एकड़ के प्लाट में इस तरह तुकड़ों में तरबूज लगाए कि लगातार उत्पादन मिल सके। पिछले साल जहां एक प्लाट की एक बार की खेप से दस हजार रूपए कमाए,इस वर्ष इन वेरायटी की बदौलत पचास हजार रूपए उतनी ही जमीन और अवधि में मिले।
चार किस्म के है तरबूज
प्रीतम ने अपने खेत में तरबूज की चार किस्में उगाई हैं, जिसमें अनमोल, विशाल, प्राची एवं स्वरस्वती मुख्य किस्में है। अनमोल नाम के तरबूज का रंग बाहर से हरा होता है लेकिन अन्दर से लैमन रंग का होता है। इसका स्वाद भी शहद जैसा मीठा होता है।इसी तरह विशाल नाम के तरबूज की किस्म में बाहर से पीला रंग होता है तो अन्दर से लाल सुर्ख और बिल्कुल मीठा जो खाने में अति स्वादिष्ट होता है। वहीं प्राची किस्म में बेबी तरबूज होता है जो काफी अधिक मात्रा में बोया जाता है और चौथी किस्म होती है स्वरस्वती जो की आम तौर पर बाजार में पाया जा सकता है। लेकिन अनमोल और विशाल की किस्म एक नई किस्म है।अनमोल व विशाल किस्म के तरबूज की भोपाल में ज्यादा डिमांड है। हम वहीं बेच रहे हैं। कीमत भी अच्छी मिल रही है। मार्केट में नया है लेकिन भोपाल मार्केट में आसानी से बेचा जा सकता है। उनको ज्यादातर बड़ी दुकानो व फाइव स्टार होटलों में देखा जा सकता है। उनका कहना है कि ये जो तरबूज है वह रासायनिक खाद एवं कीटनाशक दवाइयों के प्रयोग के बिना उगाए गए है। कीटनाशक के रूप में उन्होनें खेत में गोंदनुमा पदार्थ क्राप गार्ड नीली पीली स्ट्रिप का प्रयोग किया है जिससे कीट खुद ब खुद उसकी ओर आकर्षित हो जाता है और उसमें चिपक कर होकर रह जाता है, जिससे खेती कीटों के प्रकोप का शिकार नहीं हो पाती है। इसी तरह यूरिया की जगह वह कम्पोजिट खाद का प्रयोग करते है।प्रीतम ने बताया कि उन्होंने उत्पादन व आय बढ़ाने के लिए सबसे पहले पारंपरिक खेती को छोड़ा और तकनीकी खेती अपनाने के लिए उद्यानिकी विभाग के ग्रामीण विस्तार अधिकारी से पूरी जानकारी ली। साथ में खाद व पानी को समय अनुसार देने की प्रक्रिया सीखी। उनका कहना है आमतौर पर किसान बेसमय खाद व पानी देते हैं। इससे फसल बेकार हो जाती है। ड्रिप व मल्चिंग के माध्यम से रासायनिक खाद की बजाय गोमूत्र व छाछ ड्रिप से पौधों तक पहुंचाई। इससे सामग्री कम लगी व जड़ों तक पहुंची, जिससे पैदावार में काफी बढ़ोतरी हुई।
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