रामकुमार एक माह से कर रहे पानी पिलाकर मवेशियों की सेवा
जिले के निवाड़ी क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक गांव इस समय सूखा की स्थिति से जूझ रहे हैै। हालात यह हो गए है कि जानवर बूंद-बूंद पानी के लिए दरबदर भटकने लगे है। एक ओर लोगों को पीने के लिए पानी के लिए परेशान होना पड़ता है, वहीं गाय और अन्य मवेशियों की जान पर बन आई है। देखा जा रहा है कि पानी की किल्लत के चलते चारों ओर हाहाकार सा मचने लगा है।
यहां निकटवर्ती ग्राम उरदौरा निवासी रामकुमार यादव ने मवेशियों का जीवन बचाने का संकल्प लिया है और वह मवेशियों के लिए रोज पीने के पानी का इंतजाम करने लगे है। क्षेत्र के लोगों ने रामकुमार के इन प्रयासों की मुक्ति कंठ से सराहना करते हुए ग्रामीणों से उनकी सेवा भावना से सबक लेकर आगे आने की अपील की है। निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा से ही ऊपर वाला प्रसन्न होता है। रामकुमार अपने निजी बोर से प्रतिदिन पानी पोखर मे भरते ही नहीं है, बल्कि गायों को यहां लाकर पानी भी पिलाते है। सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता, आज सभी जगह पानी की परेशानी है, जिससे सभी को मिलजुल कर निबटना होगा। रामकुमार यादव ने एक अनुकरणीय पहल की है। वह प्रतिदिन सैकड़ों गायों और अन्य मवेशियों की प्यास निःस्वार्थ भाव से बुझा रहे हैं। उरदौरा में जिसने भी यह नजारा अपनी आखों से देखा, उसकी सराहना की। रामकुमार यादव इस कार्य को बिना स्वार्थ और लालच के करने मे जुटे हैं। वह इस कार्य को करके बेहद खुश हैं।
न तालाब हैं और न कुओं में पानी
ग्राम उरदौरा में कोई तालाब नहीं है, जिससे मवेशियों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही कुओं की हालात भी भीषण गर्मी के चलते और भी बिगड़ गई है। यह गांव पूरी तरह से बोर के पानी पर निर्भर है। गौ सेवा करने वाले रामकुमार कहते हैं कि यहां बोर भी रूक-रूक कर पानी देने लगे हैं, फिर भी जब तक चलेगा, वह पानी पिलाते रहेंगे। पिछले एक माह से वह गायों के अलावा अन्य मवेशियों को पानी पिलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इसके लिये किसी प्रकार का कोई नाम नहीं चाहते, यह तो उनका कर्तव्य है, जिसे वह पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यहां दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम धोर्रा मे तालाब है, लेकिन उसमें भी पानी अब न के बराबर ही बचा होगा।
कोई टिप्पणी नहीं