सरकारी खर्च पर इलाज से अनिरूद्ध अब सुनने में सक्षम,मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना बनी डूबते को तिनके का सहारा

  इंदौर --  लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा सच करते हुए राज्य शासन दुधमुहे बच्चों को विकलांगता के अभिशाप से मुक्त कराने का संकल्प लिया हैं। जिले में विशेष मुहिम चलाकर इनकी पहचान की गई तथा 400 से अधिक बच्चों का इलाज कराया गया। अब इस योजना के तहत शासकीय खर्च पर बच्चों का कॉक्लियर ट्रांसप्लान्ट भी किया जा रहा हैं। यह एक क्रांतिकारी कदम हैं1
   मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत अनिरूद्ध चौधरी उम्र 5 वर्ष पिता नीरज चौधरी ग्राम पलासिया, पोस्ट डकाचिया हितग्राही के पिता नीरज चौधरी मध्यप्रदेश पुलिस के इंदौर जिले के डायल 100 गाड़ी पर 9 हजार रूपये प्रतिमाह के मानदेय पर कार्य करते हैं। शादी के 3 साल बाद उनकी पत्नी को लड़का हुआ, जो कि जन्मजात श्रवण दोष से ग्रसित था। जब नीरज को इस बात की जानकारी हुई तो नीरज ने निजी कान-नाक-गला के विशेषज्ञ से अपने बेटे के उपचार के बारे में जानकारी ली तो चिकित्सकों के द्वारा उसे कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की सलाह दी, जिसका खर्च 2014 में 8 लाख रूपये बताया गया। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह अपने बच्चे का इलाज नहीं करा सका।
   किन्तु 2016 में नीरज को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मिली तो तत्काल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र में संपर्क किया। जहां बच्चे का पंजीयन कर समस्त आवश्यक जांचे नि:शुल्क कराई गई व विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय लेकर बच्चे का कॉक्लियर इम्प्लांट चिन्हांकित अस्पताल अरविन्दों हॉस्पिटल इंदौर में कराया गया।
   ऑपरेशन के बाद अनिरूद्ध स्वस्थ हैं। वह बोलने व सुनने लगा है और ऑपरेशन के बाद से अनिरूद्ध चौधरी स्कूल भी जाता हैं। अनिरूद्ध के पिता श्री नीरज चौधरी के बेटे का मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के अंतर्गत नि:शुल्क कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी होना किसी सपने के सच होने जैसा हैं। उन्होने राज्य शासन के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की हैं।

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