पति की मृत्यु के बाद कल्याणी ने हिम्मत से शुरू किया रोजगार
बडवानी - पति की मृत्यु के बाद जैसे आफत सी आ गई थी। चार बच्चों की जिम्मेदारी के साथ घर चलना मुश्किल हो गया था। आर्थिक परेशानियों ने तोड़ दिया था। ऐसे में आजीविका मिशन के तहत बना स्व-सहायता समूह वरदान साबित हुआ। समूह बनाकर और उससे लोन लेकर स्वरोजगार स्थापित किया और आज 15 से 20 हजार रूपये प्रति माह कमा रही है।
ये कहानी है बड़वानी के ग्राम धनोरा निवासी अनुपमा सोनी की। अनुपमा के चार बच्चे है। जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन पति श्री प्रकाशचन्द्र की असामयिक मृत्यु से जैसे सब कुछ बिखर सा गया था। बच्चो की पढ़ाई, घर की जिम्मेदारी सहित आर्थिक रूप से कल्याणी अनुपमा पर पूरा बोझ आ गया। ऐसे में उसने आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूह से सम्पर्क किया। खुद का समूह बनाकर 12 महिलाओं को जोड़ा और अगरबत्ती निर्माण यूनिट स्थापित किया। सेंधवा ब्लाक में वे पहली महिला है जिन्होनें अगरबत्ती निर्माण के सूक्ष्म उद्योग की शुरूआत की थी। इसके लिये उन्होने डेढ लाख की सहायता लेकर मशीन लगाई। अनुबंध के अनुसार माल कम्पनी को दे रही है वही ज्यादा उत्पादन की खुद बिक्री भी करती है।
आज कल्याणी अनुपमा अपने बच्चो की सहायता से एक दिन में 70 से 80 किलो अगरबत्ती का निर्माण कर लेती है। जिससे उन्हें लोन की किस्त चुकाने के बाद भी 15 हजार रूपये की शुद्ध बचत होती है।
ये कहानी है बड़वानी के ग्राम धनोरा निवासी अनुपमा सोनी की। अनुपमा के चार बच्चे है। जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन पति श्री प्रकाशचन्द्र की असामयिक मृत्यु से जैसे सब कुछ बिखर सा गया था। बच्चो की पढ़ाई, घर की जिम्मेदारी सहित आर्थिक रूप से कल्याणी अनुपमा पर पूरा बोझ आ गया। ऐसे में उसने आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूह से सम्पर्क किया। खुद का समूह बनाकर 12 महिलाओं को जोड़ा और अगरबत्ती निर्माण यूनिट स्थापित किया। सेंधवा ब्लाक में वे पहली महिला है जिन्होनें अगरबत्ती निर्माण के सूक्ष्म उद्योग की शुरूआत की थी। इसके लिये उन्होने डेढ लाख की सहायता लेकर मशीन लगाई। अनुबंध के अनुसार माल कम्पनी को दे रही है वही ज्यादा उत्पादन की खुद बिक्री भी करती है।
आज कल्याणी अनुपमा अपने बच्चो की सहायता से एक दिन में 70 से 80 किलो अगरबत्ती का निर्माण कर लेती है। जिससे उन्हें लोन की किस्त चुकाने के बाद भी 15 हजार रूपये की शुद्ध बचत होती है।
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