हल्‍दी मूल्‍य संवर्धन से इंजीनियर श्‍याम कारपेंटर ने बढाई आय

   नीमच --   जिले के मनासा विकास खण्‍ड के ग्राम भाटखेडी निवासी श्‍याम कारपेंटर खेती किसानी के साथ-साथ नौकरी भी करते हैं। नौकरी के साथ अतिरिक्‍त आय प्राप्‍त करने के लिए तीन वर्ष पूर्व हल्‍दी की खेती करना शुरू की। हल्‍दी का बीज बडवानी जिले से मंगवाया और मैड विधि से दो बीघा में उपयोग किया। हल्‍दी एक सीधे उपयोग में आने वाला खाध उत्‍पाद है। इसमें किसी प्रकार का रसायन नही डाला गया। 
   हल्‍दी बुवाई के समय वर्मी कम्‍पोस्‍ट खाद का उपयोग किया। इस हेतु कृषि अधिकारियों के सहयोग से खेत पर ही वर्मी कम्‍पोस्‍ट का प्‍लांट लगाया गया। कीटनाशक के रूप में नीम के तेल के घोल का स्‍प्रे किया। हल्‍दी की फसल 7-8 माह में पूरी तरह पक कर तैयार होती है। इसका उत्‍पादन 60 किंवटल/ बीघा हुआ। गीली हल्‍दी 20-25 रूपये किलो की दर से विक्रय होती है।
   श्‍याम कारपेंटर (8516947422) ने प्रौसेसिंग करके हल्‍दी पाउडर बनाने का कार्य किया।यह कार्य घर के सदस्‍यों ने ही मिलकर किया। गीली हल्‍दी 60 क्विंटल को उबाल कर साफ कर के सुखाया,फिर 15 दिन बाद सूखा माल पाउडर बनने के लिए तैयार हो गया। जिसे घर पर ही आटा चक्‍की में पिसकर तैयार किया। तैयार हल्‍दी पाउडर का बाजार भाव 180-200 रूपये किलो मिला। इस प्रकार श्‍याम कारपेंटर ने 10 क्विंटल हल्‍दी पाउडर से 2 लाख रूपये की आमदनी प्राप्‍त की। यदि गीली हल्‍दी बेचते तो 20-25 रूपये प्रति किलो की दर से एक-ढेड लाख रूपये ही प्राप्‍त होते। सूखी हल्‍दी को उपाउडर बनाकर बेचने से 2 लाख रूपये की आय हुई है। जो सामान्‍य से 50 हजार रूपये अधिक है। इस प्रकार मूल्‍य संवर्धन करके श्‍याम ने 50 हजार रूपये अतिरिक्‍त आमदनी प्राप्‍त की है, जो किसी भी परम्‍परागत फसल की तुलना में बहुत अधिक है। हल्‍दी की खेती इसलिए भी फायदेमंद है, क्‍योंकि इसकी कीमत हमेशा अच्‍छी रहती है। बाजार में भाव भी अच्‍छा मिलता है। इसमें बीज का खर्च 20 हजार रूपये एवं मजदूरी का खर्च 8 हजार रूपये ही आया है।

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