जैविक खेती के बने अग्रदूत कृषक हरिश्चंद्र तिवारी
उमरिया -- जिले के ग्राम दुब्बार निवासी हरिश्चंद्र तिवारी ने जैविक खेती कर उपज से कई गुना लाभ कमाकर आस पास के किसानों के लिए मिशाल पेश की है। देशी गोबर एवं गौमूत्र से निर्मित खाद के साथ कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की मदद से किसान हरिश्चंद्र तिवारी की रेतीली जमीन लाभ का जरिया बनी और अनुपजाऊ बंजर जमीन भी सोना उगलने लगी। 30 एकड़ भूमि में आधुनिक पद्धति और जैविक खाद के इस्तेमाल से हरिश्चंद्र तिवारी ने बीते वर्ष खरीफ एवं रबी सीजन में लगभग 20 लाख रूपये की शुद्ध आय अर्जित कर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के खेती को लाभ का धंधा बनाने के सपने को साकार रूप में पर्णित कर दिखाया है। किसान की मेहनत और सरकार की वैज्ञानिक पद्धति के साझा प्रयास से हुये इस कायाकल्प से आस पास के किसान आधुनिक पद्धति से जैविक खेती के लिए जागरूक हो रहे है। श्री तिवारी पहले सामान्य कृषक के रूप में परम्परागत पद्धति से खेती कर रहे थे, समय बदला, और वे आधुनकि पद्धति से खेती कर आय का जरिया बनाते हुए आज उनके पास कार, तीन ट्रेक्टर, खेती के कृषि यंत्र सहित अन्य कृषि संबंधी संसाधन भी स्वयं क्रय कर लिये है। गांव में कच्चे मकान के स्थान पर अब पक्का मकान बनाकर अब सुकून की जिंदगी जी रहे है।
प्रदेश सरकार का लगातार प्रयास है कि खेती की लागत को कम किया जाए तथा उत्पादन में निरंतर वृद्धि कर कृषि उत्पादन को दोगुना किया जाए, जिससे किसानों की आय भी दोगुनी हो सके। कृषि लागत को कम करने हेतु सबसे अच्छा प्रयास जैविक खेती ही हो सकती है। जैविक खेती में जहां मिट्टी की उर्वरता निरंतर बढ़ती है, वहीं फसलों को पानी की भी कम आवश्यकता होती है। बाजारों में जैविक उत्पादन की मांग अधिक होने से उनका मूल्य भी अधिक मिलता है।
सरकार के इस प्रयास को अमलीजामा पहनाने हेतु कलेक्टर श्री माल सिंह के निरंतर प्रयास से कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानो को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही भू-नाडेप, वर्मी कम्पोस्ट तथा कचरे से खाद बनाने के नये नये तरीके उपयोग किए जा रहे है। ऐसा करके जहां किसान गांव के कचरे से मुक्ति पा रहे हैं, वहीं फसलों को जैविक खाद देकर भरपूर उत्पादन भी प्राप्त कर रहें है।
उमरिया जिले के ग्राम दुब्बार के उन्नतशील कृषक श्री हरीशचंद तिवारी ने बताया कि वर्ष 2013 से कृषि विभाग के मैदानी अमले तथा कृषि विज्ञान केंद्र उमरिया के कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर जैविक खेती प्रारंभ की। जैविक खेती हेतु घर के आस पास वर्मी कम्पोस्ट तथा भू- नाडेप तैयार कराएं । इस विधि से खेती से जो लाभ प्राप्त हुए उनसे सीख लेते हुए खेती में रासायनिक उर्वरक की जगह जैविक खाद के उपयोग का निर्णय लिया। खरीफ मे धान एवं रबी मे गेहूं की फसल लेने के अतिरिक्त बारह मासी सब्जी की खेती से भी लाभ प्राप्त कर रहे है। जैविक से उत्पादित फसलों एवं सब्जियों की डिमाण्ड बढती जा रही है और लोग घर से ही बाजार से अधिक दाम देकर क्रय कर रहे है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किसानों की उन्नति एवं समृद्धि लाने हेतु अनेकों योजनाएं जैसे बलराम तालाब, खेतों पर नल कूप खनन, कृषि ऋण की उपलब्धता, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा योजना जैसी अनेकों योजनाएं संचालित की है, जिनका कृषि पर सकारात्मक प्रभाव हुआ है।
आज मध्यप्रदेश देश में कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्य माना जाने लगा है। प्रदेश को पांच बार से लगातार कृषि कर्मण आवार्ड प्राप्त हो रहा है। सरकार ने फसल उत्पादन का उपार्जन भी प्रारंभ किया है। मध्यप्रदेश सरकार देश की पहली सरकार है जिसने गत वर्ष उपार्जन के माध्यम से गेहूं बेचने वाले किसानों को 200 रू. प्रति क्विटल की दर से बोनस देने का निर्णय लिया है। हम सब प्रदेश सरकार के प्रति आभारी है और इस बात की प्रतिबद्धता जाहिर की, कि और अधिक परिश्रम से खेती कर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में स्वावलंबी बनाने का प्रयास निरंतर जारी रखेंगे।
प्रदेश सरकार का लगातार प्रयास है कि खेती की लागत को कम किया जाए तथा उत्पादन में निरंतर वृद्धि कर कृषि उत्पादन को दोगुना किया जाए, जिससे किसानों की आय भी दोगुनी हो सके। कृषि लागत को कम करने हेतु सबसे अच्छा प्रयास जैविक खेती ही हो सकती है। जैविक खेती में जहां मिट्टी की उर्वरता निरंतर बढ़ती है, वहीं फसलों को पानी की भी कम आवश्यकता होती है। बाजारों में जैविक उत्पादन की मांग अधिक होने से उनका मूल्य भी अधिक मिलता है।
सरकार के इस प्रयास को अमलीजामा पहनाने हेतु कलेक्टर श्री माल सिंह के निरंतर प्रयास से कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानो को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही भू-नाडेप, वर्मी कम्पोस्ट तथा कचरे से खाद बनाने के नये नये तरीके उपयोग किए जा रहे है। ऐसा करके जहां किसान गांव के कचरे से मुक्ति पा रहे हैं, वहीं फसलों को जैविक खाद देकर भरपूर उत्पादन भी प्राप्त कर रहें है।
उमरिया जिले के ग्राम दुब्बार के उन्नतशील कृषक श्री हरीशचंद तिवारी ने बताया कि वर्ष 2013 से कृषि विभाग के मैदानी अमले तथा कृषि विज्ञान केंद्र उमरिया के कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर जैविक खेती प्रारंभ की। जैविक खेती हेतु घर के आस पास वर्मी कम्पोस्ट तथा भू- नाडेप तैयार कराएं । इस विधि से खेती से जो लाभ प्राप्त हुए उनसे सीख लेते हुए खेती में रासायनिक उर्वरक की जगह जैविक खाद के उपयोग का निर्णय लिया। खरीफ मे धान एवं रबी मे गेहूं की फसल लेने के अतिरिक्त बारह मासी सब्जी की खेती से भी लाभ प्राप्त कर रहे है। जैविक से उत्पादित फसलों एवं सब्जियों की डिमाण्ड बढती जा रही है और लोग घर से ही बाजार से अधिक दाम देकर क्रय कर रहे है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किसानों की उन्नति एवं समृद्धि लाने हेतु अनेकों योजनाएं जैसे बलराम तालाब, खेतों पर नल कूप खनन, कृषि ऋण की उपलब्धता, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा योजना जैसी अनेकों योजनाएं संचालित की है, जिनका कृषि पर सकारात्मक प्रभाव हुआ है।
आज मध्यप्रदेश देश में कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्य माना जाने लगा है। प्रदेश को पांच बार से लगातार कृषि कर्मण आवार्ड प्राप्त हो रहा है। सरकार ने फसल उत्पादन का उपार्जन भी प्रारंभ किया है। मध्यप्रदेश सरकार देश की पहली सरकार है जिसने गत वर्ष उपार्जन के माध्यम से गेहूं बेचने वाले किसानों को 200 रू. प्रति क्विटल की दर से बोनस देने का निर्णय लिया है। हम सब प्रदेश सरकार के प्रति आभारी है और इस बात की प्रतिबद्धता जाहिर की, कि और अधिक परिश्रम से खेती कर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में स्वावलंबी बनाने का प्रयास निरंतर जारी रखेंगे।
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