ई-रिक्शा से लखनलाल के आये अच्छे दिन
बालाघाट -- सवारी ढोते-ढोते साईकिल रिक्शा का पायडल मारने में लखनलाल की जवानी गुजर गई। लेकिन अब उसके अच्छे दिन आ गये है। उसे अब साईकिल रिक्शा नहीं चालाना पड़ता है। अब वह बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा का मालिक बन गया है और अपने परिवार का गुजारा अच्छे से करने लगा है।
वार्ड नंबर-22 बालाघाट के निवासी लखनलाल को नगर पालिका बालाघाट द्वारा एक लाख 50 हजार रुपये का ई-रिक्शा प्रदान किया गया है। इसमें 30 हजार रुपये शासन का अनुदान है और 20 हजार रुपये लखनलाल ने स्वयं की जमा पूंजी से अंशदान किया है। शेष एक लाख रुपये लखनलाल को बैंक से ऋण के रूप में दिलाये गये है। लखनलाल जबसे ई-रिक्शा चला रहा है उसकी हर दिन औसतन 300 रुपये की आय हो जाती है। लखनलाल को ई-रिक्शा के मेंटेंनेंस में कोई खर्च नहीं आ रहा है और न ही ईंधन का खर्च लग रहा है। एक बार बैटरी चार्ज कर लेने पर 70 किलोमीटर तक ई-रिक्शा आराम से सफर कर लेता है।
लखनलाल ने बताया कि ई-रिक्शा का मालिक बनने से वह बहुत खुश है। अपने पांच सदस्यों के परिवार का गुजारा करने के लिए उसे अब अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता है। ई-रिक्शा से उसे इतनी कमाई हो जाती है कि वह ऋण की 2200 रुपये मासिक की किश्त समय पर अदा करने के साथ परिवार का भरण-पोषण भी अच्छे कर रहा है। वह बहुत जल्दी ऋण अदा करना चाहता है।
वार्ड नंबर-22 बालाघाट के निवासी लखनलाल को नगर पालिका बालाघाट द्वारा एक लाख 50 हजार रुपये का ई-रिक्शा प्रदान किया गया है। इसमें 30 हजार रुपये शासन का अनुदान है और 20 हजार रुपये लखनलाल ने स्वयं की जमा पूंजी से अंशदान किया है। शेष एक लाख रुपये लखनलाल को बैंक से ऋण के रूप में दिलाये गये है। लखनलाल जबसे ई-रिक्शा चला रहा है उसकी हर दिन औसतन 300 रुपये की आय हो जाती है। लखनलाल को ई-रिक्शा के मेंटेंनेंस में कोई खर्च नहीं आ रहा है और न ही ईंधन का खर्च लग रहा है। एक बार बैटरी चार्ज कर लेने पर 70 किलोमीटर तक ई-रिक्शा आराम से सफर कर लेता है।
लखनलाल ने बताया कि ई-रिक्शा का मालिक बनने से वह बहुत खुश है। अपने पांच सदस्यों के परिवार का गुजारा करने के लिए उसे अब अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता है। ई-रिक्शा से उसे इतनी कमाई हो जाती है कि वह ऋण की 2200 रुपये मासिक की किश्त समय पर अदा करने के साथ परिवार का भरण-पोषण भी अच्छे कर रहा है। वह बहुत जल्दी ऋण अदा करना चाहता है।
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