दिव्यांग सुदामा ने स्वयं के पैरों पर चार वर्ष बाद पार की दहलीज़


बडवानी -  किसी भी व्यक्ति के जीवन में घटित होने वाली दुर्घटनाएं अकस्मात ही होती हैं, ऐसी ही एक घटना ग्राम सिलावद के भेरूघाट में स्थापित भैरव मंदिर के पुजारी लकड़िया बाबा के बेटे सुदामा के साथ वर्ष 2015 में घटित हुई।
   बड़वानी जिले के ग्राम सिलावद निवासी सुदामा भी यूं तो आम बच्चों के समान ही जन्मा था। किन्तु आज से 3 वर्षो पूर्व वह अपने हमउम्र के बच्चों के साथ कैरम खेलते हुए लोगो को देखने गया। जहां पर लोग कैरम खेल रहे थे, उस जगह बारिश का समय होने के कारण ऊपर गुजर रही बिजली की हाईटेंशन लाईन ने अचानक ही सुदामा को अपनी चपेट में ले लिया। जिसने उसके शरीर से दाहिना हाथ एवं बांया पैर छीन लिया।
   लकड़िया बाबा के तीन लड़कों में सबसे बड़े बेटे के साथ हुई घटना ने उसके पिता को मानो हताशा से भर दिया।
   शासन के सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संचालित निःशक्त कल्याण योजनान्तर्गत सुदामा को आशाग्राम संस्थान में संचालित ‘‘जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र‘‘ के माध्यम से कृत्रिम हाथ व पैर लगाया गया। जिसे देखकर सुदामा बहुत खुश हुआ और उसने कहा कि ये हाथ और पैर अब उसके आत्मविश्वास को ओर बढ़ायेगा।
   जिला दिव्यांग पुनर्वास संस्थान के विशेषज्ञों ने बताया कि सुदामा का सीधा हाथव बाया पैर पूरी तरह से जल चुका था परन्तु कृत्रिम हाथ व पैर के लगने उसके आत्मविश्वास में वृद्धि जरूर होगी। प्रदत्त उपकरण के सहयोग से स्वयं के पैरों पर चार वर्ष बाद दहलीज़ पार कर रहा है, यह हमसभी के साथ-साथ पीड़ित दिव्यांग के परिवार का भी उत्साहवर्द्धन करताहै।
   सुदामा के परिजन भी शासन की योजना के तहत 29 हजार रुपये मूल्य के मिले इस निःशुल्क कृत्रिम हाथ व पैर को पाकर खुश है। उन्हें विश्वास है कि उनका पुत्र अब इस कृत्रिम हाथ और पैर के सहारे स्वयं चलकर अपना कार्य खुद कर पायेगा।

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