एक बार फिर बना निर्वाना फाउण्डेशन लावारिस एवं मानसिक विछिप्त महिला का सहारा

  छतरपुर  -- महिला एवं बाल विकास विभाग से मान्यता प्राप्त संस्था निर्वाना फाउण्डेशन द्वारा संचालित स्वाधार गृह एक बार फिर विपत्तिग्रस्त महिला का सहारा बना I सविता यादव जिसे 23 दिसंबर 2017 को महोबा में लावारिस स्थिति में पाए जाने पर महिला हेल्पलाइन (उ.प्र) द्वारा रात को निर्वाना फाउण्डेशन  स्वधार गृह में लाया गया था I उस समय वो अपना मानसिक संतुलन खोये हुए थी और उसे कुछ भी याद नहीं था I कई दिनों से भूखे प्यासे, बिना सोये, बिना नहाये , दर दर की ठोकरे खाने से उसकी हालत पागलो जैसी हो गयी थी I उसके शरीर एवं कपड़ो से बहुत बदबू आ रही थी I ठण्ड होने कि वजह से उसे रात को खाना खिला कर सुला दिया गया था I अगले दिन सुबह जब उसको नहलाने के लिये ले गये तो देखा कि उसके बालो में गुटका के पाउच, चुईन्गम और तारकोल चिपका हुआ है जिसे काटकर बालो से निकला गया और उसे डेतोइल से नहलाकर नये साफ़ सुथरे कपड़े पेहनाये गये I स्वाधार गृह मे आने के बाद 10 - 15 दिनो तक वो बिलकुल नहीं सोयी और रात भर कमरे के अंदर घुमती रहती थी I इस दौरान उसे डाक्टर को दिखाया गया ताकि वो अच्छे से सो पाये और उसकी मानसिक स्थिति ठीक हो जाये I कुछ दिनों तक दवाईयां खाने के बाद सविता धीरे धीरे ठीक होने लगी और वो सब लोगो के साथ मिल जुल कर खुश रहने लगी I अब वो सबके साथ काम करती थी , शरीर और दिमाग़ से कमजोर लोगो की सेवा करती थी, उनको खाना खिलाती थी और उनकी देखभाल करती थी I स्वधार गृह में उसे पड़ना लिखना सिखाया गया और वो अब अपने हस्ताक्षर करना सिख गयी थी I
   निर्वाना परिवार मे आने के बाद उसकी इतनी देखभाल कि गयी कि वो कुछ ही महीनों में एक दम ठीक हो गयी और उसे सब कुछ याद आ गया कि वो कहा की है और उसका परिवार कहा पर रहता है I उसके बताये अनुसार उसका गाँव हिम्मतपुरा, मात्कुआ में है और उसके पति का नाम साधू यादव है I फिर क्या था, अगले ही दिन उसे गाड़ी में बिठाकर उसके गाँव हिम्मतपुरा पहुचे और सब लोगो से पूछताछ की, तब पता चला कि सविता कि शादी 8 वर्ष पूर्व साधू यादव के साथ हुई थी और पिछेले वर्ष के नवरात्रे से उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गयी थी I वो गाँव के लोगो को मारती थी, गाली देती थी, दिन भर गाँव में घुमती रहती थी और एक पागल इंसान की तरह बर्ताव करने लगी थी I घर वालो ने उसका बहुत इलाज़ करवाया पर वो ठीक नहीं हो पायी I एक दिन उसका पति साधू यादव उसे डाक्टर को दिखाने अपने साथ चित्रकूट ले गया था और उसी दिन रात को रामघाट पर सोते समय सविता अपने पति से बिछड़ गयी और तीन चार दिन बहुत खोजने के बाद जब वो नहीं मिली तो साधू यादव मायूस होकर काम कि तलाश में गुडगाँव चला गया था I 
   घर वालो से साधू यादव का मोबाइल नंबर लेकर जब उसे गुडगाँव फ़ोन किया और सविता के बारे में बताया तब वो ख़ुशी के मारे रोने लगा और उसको विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी पत्नी जिन्दा और सुरक्षित छतरपुर में है I चार महीने से बिछड़ने के बाद 26 अप्रैल  2018 को जब साधू यादव अपनी पत्नी सविता यादव को मिलने और उसे घर ले जाने के लिये निर्वाना फाउण्डेशन आया तब दोनों एक दुसरे को देखकर और मिलकर बहुत खुश हुए और उनकी आखों से आंसू गिरने लगे और मानो उनकी खोयी हुई दुनिया उन्हें वापस मिल गयी हो I स्वधार गृह की कागज़ी कार्यवाही करने के बाद साधू यादव को उसकी पत्नी सविता यादव सुपुर्द कर दी गयी और वो दोनों ख़ुशी ख़ुशी अपने गाँव हिम्मतपुरा चले गए I एक बार फिर से निर्वाना फाउण्डेशन द्वारा संचालित स्वधार गृह के मध्यम से चार महीने के बाद एक लावारिस एवं मानसिक विछिप्त महिला को उसका खोया हुआ घर और परिवार वापस मिल गया I

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