नौकरी की बजाए खेती को अपना कर मिसाल की कायम "सफलता की कहानी" 20 लाख रूपये सालाना कमा रहे है दीपक धाकड

   नीमच जिले की जावद तहसील के ग्राम हतुमंतिया निवासी दीपक पिता प्रहलाद धाकड (मोबाईल नम्‍बर 9424572080) खेती में रूचि होने से क़ृषि में स्‍नातक करने के बाद नौकरी के पीछे भागने के  बजाए, खेती करने का निर्णय लिया। परिवार में परम्‍परागत रूप से खेती कार्य सामान्‍य तरीके से किया जाता रहा हैं। परन्‍तु दीपक ने कुछ नया करने की सोची। उसने क़ृषि विभाग के श्री रामबरन जाटव से मुलाकात कर जिले के अंदर क़ृषक भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान पता चला, कि नीमच जिले के ही ग्राम तुम्‍बा में भी स्‍ट्राबेरी की खेती आरम्‍भ हुई है।
   दीपक धाकड ने तुम्‍बा मे किसान के यहां जाकर देखा, और स्‍ट्राबेरी की खेती में आर्थिक लाभ को समझा। वर्ष 2016 के अक्‍टूबर माह में दीपक ने एक हेक्‍टेयर भूमि में स्‍ट्राबेरी के पौधे मल्चिंग विधि से लगाए। इसमें प्रति पौधा 8 रूपये के हिसाब से 60 हजार पौधे लगाए। इस प्रकार  से कुल 4.8 लाख रूपये के पौधे तथा अन्‍य व्‍यय मल्‍च, खाद, दवा में कुल 5.2 लाख रूपये का व्‍यय हुआ। ड्रिप आदि की सुविधा घर पर पहले से ही मौजूद थी। रोपाई के डेढ माह बाद उत्‍पादन आरम्‍भ हुआ। जिसे विक्रय हेतु दिल्‍ली भेजना शुरू किया। औसतन प्रति पौधा से लगभग एक किलोग्राम उपज प्राप्‍त हुई। इस प्रकार 60 हजार पोधों की औसत उपज 60 हजार किलोग्राम प्राप्‍त हुई, जो 50 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची गई।
   इस तरह दीपक धाकड को 30 लाख रूपये की आमदनी हुई। कुल लागत 10 लाख रूपये व्‍यय काटने के बाद 20 लाख रूपये की शुद्ध बचत हुई। जिसे दीपक 10 साल नौकरी करने पर भी नही कमा पाते। दीपक का अन्‍य किसान भाईयो से भी कहना है, कि नवीनतम तकनीक और बाजार पर आधारित खेती करके वह खेती को लाभ का धंधा बना सकते है।

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