प्रोजेक्ट स्वावलंबन ने राम दिनेश पाल के जीवन को आर्थिक रूप से किया समृद्ध "कहानी सच्ची है"
जिले के छिन्दवाडा नगर निगम के खजरी क्षेत्र के निवासी श्री राम दिनेश पाल की दुकान प्रोजेक्ट स्वावलंबन के अंतर्गत अच्छी चल रही है और वे प्रतिदिन 300 से लेकर 400 रूपये तक की आय प्राप्त कर रहे हैं। इस योजना ने उनके जीवन को आर्थिक रूप से समृद्ध कर दिया है और वे अत्यंत प्रसन्न हैं।
छिन्दवाडा नगर निगम के खजरी क्षेत्र के श्री राम दिनेश पाल 75 प्रतिशत नि:शक्त हैं और अपनी नि:शक्तता के कारण वे अपनी आजीविका व बेहतर जीवन को लेकर हमेशा चिंतित और परेशान रहते थे। उन्हें किसी तरह प्रोजेक्ट स्वावलंबन की जानकारी मिली तो उन्होंने जनपद पंचायत छिन्दवाडा से संपर्क कर मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना के अंतर्गत ऋण प्रकरण तैयार कराया और बैंक को भिजवाया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र की छिन्दवाड़ा शाखा ने उनका ऋण प्रकरण स्वीकृत कर 1.55 लाख रूपये की राशि उपलब्ध कराई जिससे उन्होंने कलेक्ट्रेट कैंपस में सांची पार्लर की दुकान खोली। इस दुकान में सांची उत्पाद के अलावा चाय, लस्सी, कोलड्रिंक्स बेचने के साथ ही फोटो कॉपी करने का काम भी किया जा रहा है। श्री पाल ने बताया कि अब प्रोजेक्ट स्वावलंबन के अंतर्गत उनकी दुकान अच्छी चल रही है। वे नियमित रूप से ऋण की किश्त चुकता करने के साथ ही बचत भी कर रहे है। वे कहते हैं कि स्व-रोजगार योजनाओं से कोई भी दिव्यांग अपनी आजीविका को बेहतर ढंग से संचालित करके अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।
छिन्दवाडा नगर निगम के खजरी क्षेत्र के श्री राम दिनेश पाल 75 प्रतिशत नि:शक्त हैं और अपनी नि:शक्तता के कारण वे अपनी आजीविका व बेहतर जीवन को लेकर हमेशा चिंतित और परेशान रहते थे। उन्हें किसी तरह प्रोजेक्ट स्वावलंबन की जानकारी मिली तो उन्होंने जनपद पंचायत छिन्दवाडा से संपर्क कर मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना के अंतर्गत ऋण प्रकरण तैयार कराया और बैंक को भिजवाया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र की छिन्दवाड़ा शाखा ने उनका ऋण प्रकरण स्वीकृत कर 1.55 लाख रूपये की राशि उपलब्ध कराई जिससे उन्होंने कलेक्ट्रेट कैंपस में सांची पार्लर की दुकान खोली। इस दुकान में सांची उत्पाद के अलावा चाय, लस्सी, कोलड्रिंक्स बेचने के साथ ही फोटो कॉपी करने का काम भी किया जा रहा है। श्री पाल ने बताया कि अब प्रोजेक्ट स्वावलंबन के अंतर्गत उनकी दुकान अच्छी चल रही है। वे नियमित रूप से ऋण की किश्त चुकता करने के साथ ही बचत भी कर रहे है। वे कहते हैं कि स्व-रोजगार योजनाओं से कोई भी दिव्यांग अपनी आजीविका को बेहतर ढंग से संचालित करके अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।
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