सुखनंदन बैगा को प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला आशियाना
प्रधानमंत्री आवास योजना ने ऐसे हजारो गरीबों के स्वयं के पक्के आवास का सपना साकार किया है, जिसे वे बचपन से देखते आ रहे थे।
शहडोल जिले के सांसद आदर्श ग्राम के रूप में चयनित जनपद पंचायत सोहागपुर के ग्राम केलमनिया में रहने वाले सुखनंदन बैगा भी उन्हीं परिवारों में से एक हैं। बैगा जनजाति विशेष पिछड़ी जनजाति की श्रेणी में आती है, जिनके विकास के लिये राज्य सरकार द्वारा अनेकों योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इस जाति के लोग अत्यंत संतोषी एवं दिखावे से दूर रहकर एकाकी जीवन व्यतीत करने में विश्वास करते हैं।
सुखनंदन बैगा कच्चे झोपड़े में अपने माता-पिता तथा बच्चों के साथ दशकों से निवास कर रहे थे। गांव संभागीय मुख्यालय शहडोल से नजदीक होने के कारण मजदूरी करने कभी-कभी आते थे। शहरों में पक्के देखकर उनके मन में भी इसी तरह के आवास की आस उठने लगती थी। गरीबी उनके इस सपनों को पूरा करने में सबसे बड़ी समस्या थी।
प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रारंभ होने के बाद इनका नाम भी योजना के तहत पात्रतानुसार चयनित हुआ। पहली किश्त मिलते ही उन्होने अपने सपने को साकार करना शुरू किया। अपनी मेहनत से अर्जित धन तथा भवन निर्माण में स्वयं परिवार सहित मजदूरी कर एक सुंदर सा आशियाना बनाया जिसमें टाईल्स भी लगाये। आवास में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का निर्माण कराया तथा उसका उपयोग करना प्रारंभ किया। इसके साथ ही उज्जवला योजना से उनकी पत्नी की भी इच्छा पूरी हुई जब उन्हें निःशुल्क गैस कनेक्शन का लाभ मिला।
शहडोल संसदीय क्षेत्र के सांसद श्री ज्ञान सिंह ने सांसद आदर्श ग्राम में भ्रमण के दौरान इस बैगा परिवार को गृह प्रवेश कराया। पूरा परिवार खुशी मगन था। वे सब सरकार की योजनाओं तारीफ कर रहे थे, उनका कहना था कि सरकार यदि गरीबों को दृष्टिगत रखकर योजना नहीं बनाती तो और दो-चार पीढ़ियां भी पक्के आवास में रहने का सपना पूरा नहीं होता।
शहडोल जिले के सांसद आदर्श ग्राम के रूप में चयनित जनपद पंचायत सोहागपुर के ग्राम केलमनिया में रहने वाले सुखनंदन बैगा भी उन्हीं परिवारों में से एक हैं। बैगा जनजाति विशेष पिछड़ी जनजाति की श्रेणी में आती है, जिनके विकास के लिये राज्य सरकार द्वारा अनेकों योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इस जाति के लोग अत्यंत संतोषी एवं दिखावे से दूर रहकर एकाकी जीवन व्यतीत करने में विश्वास करते हैं।
सुखनंदन बैगा कच्चे झोपड़े में अपने माता-पिता तथा बच्चों के साथ दशकों से निवास कर रहे थे। गांव संभागीय मुख्यालय शहडोल से नजदीक होने के कारण मजदूरी करने कभी-कभी आते थे। शहरों में पक्के देखकर उनके मन में भी इसी तरह के आवास की आस उठने लगती थी। गरीबी उनके इस सपनों को पूरा करने में सबसे बड़ी समस्या थी।
प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रारंभ होने के बाद इनका नाम भी योजना के तहत पात्रतानुसार चयनित हुआ। पहली किश्त मिलते ही उन्होने अपने सपने को साकार करना शुरू किया। अपनी मेहनत से अर्जित धन तथा भवन निर्माण में स्वयं परिवार सहित मजदूरी कर एक सुंदर सा आशियाना बनाया जिसमें टाईल्स भी लगाये। आवास में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का निर्माण कराया तथा उसका उपयोग करना प्रारंभ किया। इसके साथ ही उज्जवला योजना से उनकी पत्नी की भी इच्छा पूरी हुई जब उन्हें निःशुल्क गैस कनेक्शन का लाभ मिला।
शहडोल संसदीय क्षेत्र के सांसद श्री ज्ञान सिंह ने सांसद आदर्श ग्राम में भ्रमण के दौरान इस बैगा परिवार को गृह प्रवेश कराया। पूरा परिवार खुशी मगन था। वे सब सरकार की योजनाओं तारीफ कर रहे थे, उनका कहना था कि सरकार यदि गरीबों को दृष्टिगत रखकर योजना नहीं बनाती तो और दो-चार पीढ़ियां भी पक्के आवास में रहने का सपना पूरा नहीं होता।
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