उद्यान विभाग की फल क्षेत्र विस्तार योजना से लाभ कमा रहे श्री खरे "सफलता की कहानी-कृषक की जुबानी"
प्रदेश सरकार ने किसानों को उपज का उचित दाम देने के लिये मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना की अभिनव पहल की है। किसानों की दुःख तकलीफों को दूर करने में यह योजना इतनी कारगर साबित हुई है, कि एक बार फिर देश के कई अन्य दूसरे राज्य इस योजना को अपनाने के लिये आगे आये है। समुचे प्रदेश में भावांतर राशि का वितरण किसानों को किया गया। इस योजना का लाभ लेने वाले किसानों में धरमचंद भी शामिल हैं। देवरी निवासी किसान श्री धरमचंद जैन बताते है कि उन्होंने अपनी उड़द की फसल देवरी मण्डी में आकर बेची गयी। उनके द्वारा बेची गयी उपज का भुगतान उसी दिन कर दिया गया। लेकिन जब भावांतर भुगतान योजना के तहत और समर्थन मूल्य मॉडल रूप के बीच का अंतर लगभग 13 हजार रूपये उनके खाते में आया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे कहते है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि फसल बेचने के बाद इतना रूपया और मिलेगा। राशि मिलने के बाद उनके चेहरे की मुस्कान ने यह बयां कर दिया कि सरकार ने इस तरह से किसानों की सुध ली।
भावांतर भुगतान योजना में किसानों के पंजीयन के बाद उपज का प्रदेश की दो कृषि उपज मण्डियों से मॉडल रेट लेकर, चयनित फसलें और शासन द्वारा घोषित फसलों के रेट लेकर उपज का उचित दाम तय किया जाता है। वर्ष 2017 के अक्टूबर माह के 16 तारीख को मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना की शुरूआत सागर जिले के खुरई तहसील से की गई थी। किसानों की माली हालात सुधारने के लिये यह योजना लागू की गई है। यदि उत्पादन अधिक हुआ तो वे किसान को कम कीमत में फसल नहीं बेचने दी जाती। किसानों के नुकसान की भरपाई करने के लिये सरकार किसानों की फसल स्वयं वाजिब दाम पर खरीदती है।
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